T20 WC 2026: स्पॉट-फिक्सिंग के साए में क्रिकेट, कप्तान दिलप्रीत बाजवा पर उठे गंभीर सवाल

T20 विश्व कप 2026 के दौरान कनाडा के कप्तान दिलप्रीत बाजवा स्पॉट-फिक्सिंग के आरोपों से घिर गए हैं। सट्टेबाजी सिंडिकेट और बिश्नोई गैंग के संभावित कनेक्शन की जांच जारी है।
T20 विश्व कप 2026 की चमक के बीच स्पॉट-फिक्सिंग के गंभीर आरोपों ने क्रिकेट जगत को झकझोर कर रख दिया है। इस विवाद के केंद्र में कनाडा के कप्तान दिलप्रीत बाजवा हैं, जिनके ऊपर मैच के दौरान संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने का संदेह जताया गया है।
दिलप्रीत बाजवा तब सुरक्षा एजेंसियों और एंटी-करप्शन यूनिट (ACU) के रडार पर आए जब न्यूजीलैंड के खिलाफ मैच में उनके द्वारा फेंके गए एक ओवर ने सबको हैरान कर दिया। यह ओवर न केवल बेहद महंगा साबित हुआ, बल्कि इसमें गेंदबाजी का तरीका भी काफी असामान्य था, जिसने सट्टेबाजी के बाजार में कई संदिग्ध हलचलें पैदा कीं। इस खुलासे के बाद से ही एसीयू ने बाजवा से गहन पूछताछ शुरू की है और उनके व्यक्तिगत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी जांच के दायरे में लिया गया है।
चेन्नई के मैदान पर क्या हुआ था?
17 फरवरी को चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में कनाडा ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 173 रन बनाए थे। हालांकि, कीवी टीम के बल्लेबाजों ने जिस तरह से कनाडा के गेंदबाजी आक्रमण को ध्वस्त किया, वह महज एकतरफा जीत नहीं बल्कि एक बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहा था। न्यूजीलैंड ने मात्र 15.1 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया। ग्लेन फिलिप्स और रचिन रवींद्र की ताबड़तोड़ बल्लेबाजी के सामने कनाडा के गेंदबाज पूरी तरह बेबस नजर आए, जिससे मैच की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे।
इस घटनाक्रम के पीछे लॉरेंस बिश्नोई गैंग के कथित कनेक्शन की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी सिंडिकेट अब क्रिकेटरों को निशाना बनाने के लिए संगठित अपराध जगत का सहारा ले रहे हैं। यह स्थिति खेल की साख के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं है, क्योंकि इसमें केवल पैसे का खेल नहीं, बल्कि आपराधिक धमकी और ब्लैकमेलिंग का एंगल भी जुड़ता नजर आ रहा है।
क्रिकेट की साख पर बढ़ता खतरा
ऐतिहासिक रूप से क्रिकेट हमेशा से सट्टेबाजों का पसंदीदा खेल रहा है, लेकिन अब तकनीक और संगठित अपराध के मेल ने इसे और अधिक जटिल बना दिया है। यदि एक राष्ट्रीय टीम का कप्तान इन आरोपों में दोषी पाया जाता है, तो यह वैश्विक क्रिकेट के लिए एक बड़ा प्रशासनिक संकट होगा। प्रशंसकों के बीच यह अविश्वास पैदा करता है कि क्या उनके द्वारा देखा जा रहा रोमांचक मुकाबला वाकई में असली है या फिर किसी स्क्रिप्ट का हिस्सा।
खेल विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं केवल खिलाड़ियों की छवि ही नहीं, बल्कि उस पूरी लीग की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाती हैं। अगर जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो आने वाले समय में आईसीसी को खिलाड़ियों की सुरक्षा और उनके निजी संपर्कों की निगरानी के लिए और अधिक कड़े नियम लागू करने होंगे। फिलहाल, प्रशंसकों की निगाहें जांच के नतीजों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि क्या टी20 क्रिकेट का भविष्य सुरक्षित है या नहीं।