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पटना में स्वगणना का आज आखिरी दिन: कल से मकान सूचीकरण शुरू

पटना जिले में स्वगणना का शुक्रवार आखिरी दिन है। शनिवार से मकान सूचीकरण और आवास गणना का काम शुरू होगा।

पटना में स्वगणना का आज आखिरी दिन है, और इसके बाद जिले का अगला बड़ा चरण शुरू होने वाला है। जनगणना के तहत चल रही स्वगणना प्रक्रिया शुक्रवार को पूरी हो जाएगी, जबकि शनिवार से मकान सूचीकरण व आवास गणना के काम की शुरुआत होगी।

अवर जनगणना पदाधिकारी विदुर भारती के मुताबिक, अब तक जिले में 2 लाख 22 हजार 548 परिवारों ने स्वगणना में हिस्सा लिया है। प्रदर्शन के मामले में पटना फिलहाल पूरे प्रदेश में चौथे स्थान पर है। यह जानकारी Misryoum के माध्यम से साझा की गई।

इस चरण की समय-सीमा तय होने का सीधा असर आगे की कवरेज पर पड़ता है। स्वगणना के बाद जब घर-घर सर्वे की तैयारी शुरू होती है, तब प्रशासनिक कार्यों की गति और डेटा की गुणवत्ता दोनों महत्वपूर्ण हो जाती हैं।

पदाधिकारी ने बताया कि मकान सूचीकरण और आवास गणना के लिए प्रगणक व पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है। इसके बाद, 31 मई तक इस प्रक्रिया को पूरा कराने के उद्देश्य से दस हजार प्रगणकों व पर्यवेक्षकों को रिजर्व में रखा गया है।

प्रशासन के अनुसार, पटना राजधानी होने और प्रदेश में सर्वाधिक शहरी आबादी वाले जिले की पहचान के साथ भी स्वगणना में पहले स्थान की उम्मीद थी। हालांकि, आंकड़ों के मुताबिक यह अपेक्षा वैशाली और मुजफ्फरपुर जैसे जिलों से पीछे रहने के कारण पूरी नहीं हो पाई। Misryoum यह तथ्य रिपोर्ट करता है कि यही वजह चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

फिर भी, शहरों में जागरूकता का स्तर लगातार बदलता रहता है। स्वगणना के दौरान भागीदारी जितनी बेहतर होगी, उतनी ही आसानी से आगे के मकान सूचीकरण और आवास गणना में सटीक जानकारी जुटाई जा सकेगी।

अब मकान सूचीकरण के दौरान प्रगणक घर-घर जाकर विस्तृत आंकड़े एकत्र करेंगे और आवास से जुड़ी जानकारी दर्ज करेंगे। इस पूरी कवायद में सही और पूर्ण विवरण जुटाना केंद्र में रहेगा।

जिले के डीएम ने नागरिकों से अपील की है कि वे प्रगणकों को पूरा सहयोग दें और सही जानकारी साझा करें, ताकि राष्ट्र के विकास के लिए जनगणना से जुड़े आंकड़े भरोसेमंद बन सकें। उनके अनुसार, जनगणना राष्ट्रीय महत्व का विषय है और सटीक आंकड़े देश व प्रदेश के लिए नीति-योजना बनाने में मदद करते हैं।

आंकड़ों की यह प्रक्रिया केवल रिकॉर्ड भरने तक सीमित नहीं रहती। सही डेटा प्रशासनिक प्राथमिकताओं और संसाधनों के आवंटन की दिशा तय करता है, इसलिए हर घर की भूमिका अहम हो जाती है।