NCR की ऊंची इमारतों में आग बुझाना चुनौती: बड़ी कमियां उजागर

NCR में हाइराइज इमारतें बढ़ रही हैं, लेकिन दमकल की ऊंचाई तक पहुंचने वाली क्षमता सीमित बताई जा रही है।
NCR की ऊंची इमारतों में आग बुझाने की तैयारी पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि इमारतें तेजी से बढ़ीं हैं लेकिन सुरक्षा के साधन उसी रफ्तार से नहीं दिखते।
एनसीआर में 30 से 40 मंजिल या उससे अधिक ऊंचाई वाली इमारतों की संख्या बढ़ रही है और महंगे आवासों की मांग भी कायम है, मगर आग लगने की स्थिति में दमकल की पहुंच को लेकर बड़ी कमी सामने आ रही है। Misryoum के मुताबिक, नोएडा और गाजियाबाद के आसपास अधिकतर उपलब्ध हाइड्रोलिक प्लेटफार्म 15 से 17 मंजिल तक की चुनौती को ही आसान बनाते हैं।
Misryoum यह भी बता रहा है कि ऊपरी मंजिलों पर आग लगने पर दमकल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि ऊंचाई वाला उपकरण सीमित है और आपात स्थिति में यही निर्णायक भूमिका निभाता है। इस संदर्भ में महज 42 मीटर के एक प्लेटफार्म की बात सामने आई है, जबकि क्षेत्र में बहुमंजिला इमारतों की संख्या काफी बताई जाती है।
यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है कि ऊंचाई बढ़ने के साथ आग का फैलाव, धुआं और लोगों की निकासी का जोखिम भी बढ़ता है। जब उपकरणों की क्षमता सीमित रहती है, तो आपात प्रतिक्रिया का समय और रणनीति प्रभावित हो सकती है।
गाजियाबाद में 42 मीटर वाले हाइड्रोलिक प्लेटफार्म के अलावा अतिरिक्त बड़े प्लेटफार्म की जरूरत भी उठ रही है। कुछ समय पहले प्लेटफार्म स्वीकृत होने की चर्चा के बीच खरीद प्रक्रिया चलने का दावा किया गया है, हालांकि ऊंचाई को लेकर अभी भी पर्याप्तता पर सवाल बने हुए हैं।
इस बीच, क्षेत्र में नए फायर स्टेशन और इन्फ्रास्ट्रक्चर की योजना की बात भी सामने आती है, जैसे कि गाजियाबाद में फायर स्टेशन निर्माण को लेकर संबंधित प्रक्रियाएं चलने की जानकारी दी गई। वहीं, नोएडा में अग्निशमन केंद्रों की मौजूदा व्यवस्था के साथ-साथ 102 मीटर के प्लेटफार्म और रोबोट फायर जैसी तैयारियों की योजना भी चर्चा में है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि शहर की आबादी और ऊंची इमारतों का पैमाना बढ़ रहा है, जबकि उपकरण और फायर-रेस्पॉन्स का नेटवर्क उसी अनुपात में मजबूत होना जरूरी है। वरना आग के दौरान असर और बढ़ सकता है।
नोएडा में हाइराइज फायर फाइटिंग व्हीकल के ट्रायल का उल्लेख भी किया गया है, साथ ही सेक्टर 94 में निर्माणाधीन एक बहुत ऊंची इमारत का जिक्र है जो फिलहाल तय मंजिलों तक सक्रिय बताई गई है। इसी कड़ी में ग्रुरुग्राम की स्थिति अलग तरह की चुनौती दिखाती है, जहां 100 मीटर से ऊंची इमारतों के आसपास हाइड्रोलिक प्लेटफार्म की कमी बताई गई है।
Misryoum के मुताबिक, ग्रुरुग्राम में पुराने जर्जर उपकरण को लेकर भी व्यवस्थागत अड़चनें सामने आईं, और आपात स्थिति में दूसरी जगह उपलब्ध ऊंचाई वाले हाइड्रोलिक की मदद लेने की नौबत का वर्णन किया गया। अधिकारियों के अनुसार 104 मीटर ऊंचाई वाले प्लेटफार्म की खरीद प्रक्रिया जल्द शुरू होने की बात भी कही गई है।
अंत में, दिल्ली में भी पर्याप्त साधन को लेकर सीमाएं बताई गईं, जहां 70 मीटर तक की क्षमता वाले वाहनों की उम्र पूरी होने की बात सामने आई। इसके साथ ही 90 मीटर और 53 मीटर वर्ग की मशीनों से जुड़े ऑर्डर और अन्य उपकरणों का उल्लेख किया गया है, लेकिन सवाल यह है कि ऊंचाई वाली इमारतों के अनुपात में प्रतिक्रिया की क्षमता कब पूरी तरह तैयार होगी। यह मामला इसलिए अहम है कि बहुमंजिला इमारतों का विस्तार लगातार जारी रहने के साथ सुरक्षा का ढांचा भी भरोसेमंद तरीके से मजबूत होना चाहिए।