मिजोरम की मां का बड़ा दिल: ब्रेन डेड बेटे के अंग दान से चार जिंदगियां रोशन

ब्रेन डेड घोषित मिजोरम युवक मोइंगसुहा के अंगदान से चार मरीजों को नई उम्मीद मिली। हादसे के बाद मां के साहस ने जीवन बचाने की मिसाल कायम की।

मिजोरम की एक मां के फैसले ने चार जिंदगियां रोशन कर दीं। दर्द के बीच लिया गया यह निर्णय मानवीयता की ऐसी कहानी है जो लोगों को अंगदान के प्रति सोचने पर मजबूर करती है।

मामित जिले के तुइपुइबारी गांव की निवासी एक मां ने अपने 24 वर्षीय बेटे मोइंगसुहा के ब्रेन डेड घोषित होने के बाद अंगदान का फैसला किया। मोइंगसुहा अपनी बहन से मिलने अहमदाबाद आए थे और 25 अप्रैल को शहर के मेम्को ब्रिज के पास हुए गंभीर सड़क हादसे में उनके सिर पर गहरी चोट लगी। तत्काल उन्हें अहमदाबाद सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां करीब तीन दिन तक इलाज चला। यही वह मोड़ था, जहां परिवार के सामने जिंदगी और मौत की सख्त वास्तविकता आकर खड़ी हो गई।

बाद में डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इस खबर ने परिवार को भीतर तक हिला दिया, लेकिन उसी कठिन क्षण में मां ने हिम्मत दिखाई। अंगदान के जरिए मोइंगसुहा का हृदय, लीवर और दोनों किडनी दान की गईं। इन अंगों के मिलने के बाद चार जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिलने का रास्ता खुल सका। अस्पताल की व्यवस्था के मुताबिक, जिन अंगों का प्रत्यारोपण संभव हुआ, वह अहमदाबाद के सिविल मेडिसिटी परिसर के अस्पतालों में किया गया। हृदय का प्रत्यारोपण यू.एन.. मेहता अस्पताल में हुआ, जबकि लीवर और किडनी का प्रत्यारोपण आईकेडीआरसी में किया गया।

यह मामला महज एक मेडिकल प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। अंगदान का असर सीधे उन लोगों तक पहुंचता है जिनके लिए समय सबसे बड़ा संकट होता है—डायलिसिस के शेड्यूल, ऑपरेशन की तैयारी, और परिवार की आर्थिक-मानसिक थकान। हादसे के बाद जब एक युवा की जिंदगी बचाई नहीं जा सकी, तब मां के निर्णय ने उन चार परिवारों के लिए उम्मीद का दरवाजा खोल दिया। कई बार लोग अंगदान की बातों को सिर्फ जागरूकता अभियानों की तरह देखते हैं, लेकिन यहां यह उम्मीद वास्तविक प्रत्यारोपण के रूप में सामने आई।

अहमदाबाद सिविल अस्पताल में यह 238वां दान बताया गया। अब तक वहां ब्रेन डेड मरीजों से कुल 1026 अंगों का दान हो चुका है। इनमें किडनी की संख्या सबसे अधिक, लीवर, आंखें और हृदय सहित अन्य अंग शामिल रहे। कुल मिलाकर इन अंगों से अब तक सैकड़ों लोगों को नया जीवन मिला है। यह आंकड़े यह संकेत देते हैं कि सिस्टम की क्षमता और लोगों की सहमति—दोनों जब साथ आते हैं, तब अंग प्रत्यारोपण की राह ज्यादा प्रभावी बनती है।

मिजोरम की इस मां का फैसला देश के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ती अंगदान जागरूकता का भी उदाहरण बनता है। वास्तविक जीवन में निर्णय लेना आसान नहीं होता, खासकर तब जब पूरा परिवार शोक में हो। फिर भी, जिम्मेदारी भरे उस पल में लिया गया यह कदम दिखाता है कि मानवता का दायरा सीमाओं से परे जा सकता है। एक ओर सड़क हादसे की त्रासदी है, दूसरी ओर अंगदान से जुड़ा उपचारात्मक संकल्प—दोनों का साथ होना ही इस कहानी को अलग बनाता है।

अंगदान की जागरूकता क्यों जरूरी है

चार जिंदगियां—और एक संदेश