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काम के घंटों पर दीपिका सिंह का बड़ा बयान

अभिनेत्री दीपिका सिंह ने मनोरंजन जगत में लंबे समय तक काम करने की वकालत करते हुए इसे क्रिएटिव फील्ड की जरूरत बताया है।

मनोरंजन जगत में शूटिंग के घंटों को लेकर चल रही लंबी बहस के बीच अभिनेत्री दीपिका सिंह ने एक अलग दृष्टिकोण साझा किया है। उनका मानना है कि क्रिएटिव काम के लिए समय की सीमा तय करना हमेशा सही नहीं होता।

दीपिका का कहना है कि उन्हें अपने काम से इतना गहरा लगाव है कि उन्हें घड़ी की सुइयां गिनना पसंद नहीं आता। उनके अनुसार, यदि शूटिंग के घंटों को सीमित कर दिया जाए, तो इसका सीधा असर पर्दे पर दिखने वाली क्वालिटी पर पड़ेगा।

इस विषय पर विचार करना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कलात्मक स्वतंत्रता और काम के बोझ के बीच के नाजुक संतुलन को दर्शाता है। कलाकारों की धारणा यह है कि बेहतर परिणाम पाने के लिए लचीलापन जरूरी है।

अभिनेत्री ने स्पष्ट किया कि जब कोई डायरेक्टर किसी दृश्य को बेहतरीन ढंग से फिल्माना चाहता है, तो उसे पर्याप्त समय की आवश्यकता होती है। उनके मुताबिक, 12-घंटे की शिफ्ट केवल थकावट नहीं, बल्कि बेहतर आउटपुट देने का एक माध्यम है।

हालांकि, दीपिका ने निजी जीवन में आने वाली चुनौतियों को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि जब परिवार को समय देने की बात आती है, तो निश्चित रूप से मुश्किलें बढ़ जाती हैं। इस उद्योग का स्वभाव ही ऐसा है कि काम का दबाव कभी बहुत ज्यादा होता है, तो कभी काम बिल्कुल नहीं होता।

अपनी थकान को दूर करने के लिए वह संघर्ष के दिनों को याद करती हैं। ट्रेन से मुंबई आने से लेकर आज फ्लाइट में सफर करने तक का सफर उन्हें लगातार कड़ी मेहनत करने के लिए प्रेरित करता है।

वह मानती हैं कि अगर वह आज अपने काम से थककर हार मान लेंगी, तो अपने सपनों को कभी पूरा नहीं कर पाएंगी। यही सकारात्मक सोच उन्हें लंबे समय तक काम करने की ऊर्जा देती है।

हाल ही में, उन्हें अन्य कलाकारों के साथ एक समारोह में देखा गया, जहां से उन्होंने अपनी मौजूदगी की झलक साझा की थी। काम के प्रति उनका यह समर्पण उनके करियर के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।

अंत में, यह समझना आवश्यक है कि मनोरंजन उद्योग की कार्यसंस्कृति पारंपरिक नौ-से-पांच की नौकरियों से काफी अलग है, जहाँ जुनून और समय का तालमेल ही सफलता की कुंजी है।