पश्चिम बंगाल की राजनीति: सत्ता का चक्र और ममता बनर्जी के सामने 1977 का संकट

पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में सत्ता के हस्तांतरण और पार्टियों के वर्चस्व का लंबा दौर रहा है। क्या ममता बनर्जी की सरकार 1977 के बाद के इतिहास को दोहराने से बच पाएगी?
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर पश्चिम बंगाल में सरकारों और मुख्यमंत्रियों के बदलने का क्या इतिहास रहा है?. राज्य में कब-कब किस पार्टी की सरकार रही है?. कैसे अलग-अलग दलों ने दशकों तक बंगाल पर शासन किया?. इस दौरान राज्य ने कितने मुख्यमंत्री देखे और एक बार सत्ता खोने के बाद कोई सरकार या मुख्यमंत्री कब-कब सत्ता में वापसी करने में सफल रहा है?. आइये जानते हैं…. पश्चिम बंगाल में सरकारों और मुख्यमंत्रियों के बदलने का क्या इतिहास रहा है?. पश्चिम बंगाल में सबसे पहला शासन कांग्रेस का रहा। आजाद भारत में बिधान चंद्र रॉय बंगाल के पहले मुख्यमंत्री बने। उन्होंने 1952 से 1962 तक लगातार 10 साल सरकार चलाई। हालांकि, 1 जुलाई 1962 को उनका निधन हो गया। इसके बाद सत्ता में आए प्रफुल्ल चंद सेन, जिन्होंने कांग्रेस की स्थिरता को बरकरार रखा और 1967 में चुनाव तक सरकार चलाई। हालांकि, 1967 के बाद का दौर बंगाल की राजनीति में उठापटक वाला रहा। इस दौरान कांग्रेस का बंटवारा हुआ और सत्ता बदलती रही।
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