india news

मानवता का उज्ज्वल उदाहरण: ब्रेन डेड पत्नी के अंगों से तीन को मिला नया जीवन

जालोर की 35 वर्षीय महिला के ब्रेन डेड होने के बाद उनके पति ने अंगदान का साहसिक फैसला लिया, जिससे तीन जरूरतमंदों को नई जिंदगी मिली।

गहरे दुख के बीच लिया गया एक साहसिक निर्णय अक्सर किसी के लिए जीवन की नई उम्मीद बनकर सामने आता है। राजस्थान के जालोर जिले की 35 वर्षीय महिला को जब चिकित्सकों ने ब्रेन डेड घोषित किया, तो उनके पति ने मानवता का एक अनुकरणीय उदाहरण पेश करते हुए अंगदान की सहमति दी।

इस कठिन परिस्थिति में लिया गया यह फैसला अब तीन मरीजों के लिए वरदान साबित हुआ है। अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में हुई इस प्रक्रिया के जरिए एक लीवर और दो किडनी को प्रत्यारोपित किया गया, जिससे तीन जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिल सका।

जालोर के जसवंतपुरा गांव की रहने वाली मोवनदेवी बागरी को एक दुर्घटना में सिर पर गंभीर चोट लगी थी। उन्हें इलाज के लिए सबसे पहले स्थानीय अस्पताल और फिर मेहसाणा के एक केंद्र में ले जाया गया, लेकिन स्थिति में सुधार न होने पर उन्हें 28 अप्रैल को अहमदाबाद सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

अंगदान का निर्णय लेना न केवल व्यक्तिगत साहस का प्रतीक है, बल्कि यह समाज के लिए एक बड़ा संदेश भी है। ऐसे समय में जब शोक का माहौल होता है, किसी और के भविष्य के बारे में सोचना मानवता की सर्वोच्च मिसाल है जो चिकित्सा विज्ञान की सीमाओं को पार कर जीवन का संचार करती है।

इलाज के दौरान 30 अप्रैल को डॉक्टरों ने मोवनदेवी को ब्रेन डेड घोषित कर दिया था। इस दुखद घड़ी में, मिसरयूम के अनुसार, अस्पताल की अंगदान टीम ने परिवार को अंगदान की प्रक्रिया और उससे होने वाले लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

पति वचनारामजी ने बिना किसी झिझक के अपनी सहमति व्यक्त की। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि यह गौरवपूर्ण कार्य गुजरात स्थापना दिवस के आसपास के समय में संपन्न हुआ, जो चिकित्सा जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

अहमदाबाद सिविल अस्पताल में अब तक 239 ब्रेन डेड मरीजों के अंगदान हो चुके हैं, जिससे सैकड़ों लोगों को जीवनदान मिला है। इन दान किए गए अंगों में किडनी, लीवर, हृदय, फेफड़े और नेत्र जैसे महत्वपूर्ण अंग शामिल हैं, जो अब तक कुल 1029 अंग और ऊतकों के आंकड़ों तक पहुंच चुके हैं।

अंगदान से जुड़े आंकड़े यह दर्शाते हैं कि एक व्यक्ति का फैसला कैसे आने वाले समय में दर्जनों परिवारों के लिए खुशियां लौटा सकता है। यह चिकित्सा क्षेत्र में सामूहिक प्रयास और जागरूकता की जीत है, जो अभाव और मृत्यु के बीच की दूरी को मिटाने में सहायक होती है।