दिल्ली अग्निकांड में बड़ा खुलासा: मंजूरी के छह, बनाए आठ फ्लैट

विवेक विहार अग्निकांड में मंजूरी के हिसाब से छह फ्लैट की जगह आठ बनाए जाने का खुलासा सामने आया है।
दिल्ली के विवेक विहार इलाके में अग्निकांड के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, वे सिर्फ हादसे की कहानी नहीं बताते, बल्कि सवालों का दायरा भी बढ़ाते हैं। आरोपों और जानकारी के मुताबिक 800 गज के जिस प्लॉट पर आग लगी, वहां नियमों के विपरीत अतिरिक्त निर्माण किया गया था।
मामले में सबसे बड़ा खुलासा यह बताया जा रहा है कि सरकारी कागजों में छह फ्लैटों की मंजूरी थी, लेकिन मौके पर आठ फ्लैट बना दिए गए। इसी अंतर की वजह को नौ लोगों की मौत से जोड़ा जा रहा है।
यह अंतर समझना इसलिए जरूरी है कि भवन अनुमतियों और वास्तविक निर्माण में फर्क होने पर सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां भी कमजोर पड़ जाती हैं। ऐसे में हादसे का रिस्क केवल तकनीकी नहीं रहता, व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, इमारत का निर्माण मास्टर प्लान के हिसाब से तय सीमा में ही होना चाहिए था। बताया गया कि 75 फीसदी हिस्से तक ही निर्माण की अनुमति थी, और अधिकतम छह फ्लैट ही बनाए जा सकते थे। फिर भी इमारत के भीतर आठ फ्लैट होने की बात सामने आई है, साथ ही पिछली तरफ के हिस्से में लोहे की ग्रिल लगाकर कवर करने का आरोप लगाया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि राहत बचाव के दौरान भी लोहे की ग्रिल काटने में काफी वक्त लगा, जिससे प्राथमिकता और समय की अहमियत पर भी सवाल खड़े हुए। इस संदर्भ में यह भी चर्चा है कि मौके पर फंसे लोगों को निकालने में सुरक्षा इंतजामों और रास्तों की भूमिका कितनी कारगर रही।
यहां सबसे चिंताजनक पहलू यही बनता है कि आग जैसी आपात स्थिति में निकासी और सुरक्षा के रास्ते पहले से तय न हों, तो नुकसान समय के साथ बढ़ सकता है।
दूसरी ओर, दिल्ली नगर निगम की तरफ से जानकारी के अभाव की बात सामने आ रही है। आरोप है कि हादसे के दौरान निगम का सूचना तंत्र सक्रिय दिखा नहीं, और यह स्पष्ट नहीं किया जा सका कि भवन का नक्शा पास था या नहीं, तथा पूर्णता प्रमाण पत्र जारी हुआ था या नहीं। साथ ही चर्चा यह भी है कि निगम अपने सूचना विभाग पर बड़े बजट का दावा करता है, लेकिन बड़े हादसे पर स्पष्ट जवाब न मिलना लोगों की बेचैनी बढ़ाता है।
इस पूरे घटनाक्रम से जुड़ा एक और संकेत यह है कि फायर सेफ्टी को लेकर पहले भी चेतावनियां और निर्देश दिए जा चुके हैं। हाल के दिनों में अग्निशमन विभाग को फायर ऑडिट और सुरक्षा तैयारियों को लेकर अलर्ट करने की बात सामने आती रही है, बावजूद इसके विवेक विहार की घटना ने यह दिखाया कि गंभीरता जमीन पर कितनी उतरती है।
आखिर में यह भी समझना अहम है कि कागज, अनुमति और वास्तविक निर्माण की कड़ी तभी काम करती है जब निगरानी और जांच का सिस्टम लगातार सक्रिय रहे। Misryoum के लिए यह घटना केवल दुखद हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और सुरक्षा मानकों की परीक्षा भी है।
इसी कड़ी में बिजली से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि घरेलू कनेक्शनों के लिए सुरक्षा निरीक्षण और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट की जिम्मेदारी तय होती है, लेकिन फील्ड स्तर पर निरीक्षण नियमित होने के दावे पर लोगों का भरोसा कम पड़ता दिखता है।